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هذه حياتي ........ للدكتور. أحمد عمر اللحوري

هذه حياتي.... 
عشتها حرمان... 
مهما ترميت... 
لها لعشقي... 
ووحيد دنيتي.... 
انت المراد... 
فلاتجبرني.... 
اغادر عنك... 
لان عشقي.... 
لازال فيك... 
ياحميل العيون... 
تفتنا بها....
قلوب.... 
لاتمن... 
فيها... 
وكم... 
مسار.... 
انت... 
بها... 
نجم... 
من... 
السماء... 
تناظر... 
برونق... 
تتلأو... 
بين الثرياء... 
والسماء...
 اعطيني.... 
من رواق.... 
الشوق.... 
ندبة... 
بها القلب... 
منها حنايا... 
ومصابه.... 
الامن... 
احسان... 
القدر... 
متنا.... 
لاتدفع... 
بكلمة.... 
تجرح.... 
مجروح.... 
ان الجراح.... 
يكابدها.... 
العشاق.... 
انا روح.... 
تعاني... 
من اصالات.... 
الهدى.... 
تنور حين.... 
اراها وتختفي.... 
لاترسم نظرات.... 
من عين.... 
الى عين عطشانة الحب....
لاظل خلف.... 
حلم.....
ربما.... 
سراب... 
لكني... 
لااراه... 
كذلك... 
ومن يعاني... 
من ندبات.... 
العواطف.... 
ونشوت....
الحب... 
بلطف... 
مايرافقه.....
يظل.... 
حبيبه.... 
الروح... 
التي... 
يتنفس... 
بها طالما... 
انه مد.... 
معه لحظات.... 
طيبه لطيفه.... 
ينتمي.... 
الى التطلع.... 
المنسجم.... 
في الفكر... 
وتناقل الافكار.... 
والبحث.....
عبر تناقل.... 
التحدث.... 
فيما نحمله.... 
ترسد الفكر وتوحيده.... 
يظل له ذكرى.... 
تواكبه في اوقاته....
 اراء من عين... 
لم يراه احد.... 
واشفق ع النون... 
وهو يمليه الدمع.... 
نهر حوله ينساق.....
من يجرح العين.... 
وهي جمال الهماء.... 
اقراء كلمات.... 
تتناثر الاحرف.... 
وتغذو حينما تتجمع.... 
كاانها شمعة تنيرو.... 
لوردة يلاطفها النسيم.... 
عطر بها يملئ المكان.... 
حيرتنا ياعين.... 
مامداء صبرك.... 
والدمع سايرو.... 
وجرح في الاعماق.... 
لايلتام جراحه..... 
بقلمي. 
د/احمدعمراللحوري.
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